ऋचा अनिरुद्ध की गिनती उन एंकर्स में होती है, जिन्होंने टीवी पत्रकारिता में भावनाओं को जिंदा रखा है। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका मानना है कि कुछ चीजें आज आप शिद्द्त से चाहते हैं तो वो कहीं न कहीं घटित होती हैं, कुछ ख्वाब जब आप बच्चे होते हैं तब भी आपके मन में पलते हैं और आज मैं सबके सहयोग से यहां तक आई हूं। ऋचा स्कूल में ही 'स्पिक मैके' (SPIC MACAY) संस्था से जुड़ी हुई थी, जो क्लासिकल म्यूजिक को प्रमोट करती है। बड़े-बड़े नाम जैसे पंडित शिवकुमार शर्मा और कृष्ण मोहन भट्ट जैसे लोग झांसी आते थे और वो उनका कार्यक्रम संभालती थीं। ऋचा की मां उनसे कोई काम नहीं करवाती थीं। एक दिन उनकी नानी ने उनसे कहा कि तुम इसको कुछ सिखाती क्यों नहीं हो? इसके जवाब में उनकी मां ने कहा कि काम तो जब सर पर आता है तो लड़का हो या लड़की, कर ही लेते हैं। बाकी मेरी बेटी घर के काम के लिए नहीं बनी है, वो कुछ बड़ा करेगी। बात 'जिंदगी लाइव' की आती है तो हर कोई ऋचा जी को याद करता है, उस शो से उनको काफी लोकप्रियता हासिल हुई थी। उन्होंने अपराधियों की भी कहानी दिखाई जो जेल से बाहर आकर एकदम बदल गए थे। उनमें से एक को नौकरी तक ऑफर हुई थी। इसके अलावा कुछ ऐसे मुस्लिम बच्चे जिनको सिर्फ शक के आधार पर पुलिस ले जाती है और बाद में वो छूट जाते हैं, उनके ऊपर भी उन्होंने स्टोरी की और कई बच्चों के ऊपर इसका अच्छा असर देखने को मिला था। ऋचा अनिरुद्ध का कहना है, '2014 के बाद मैंने एक रेडियो शो किया था, जिसका नाम था 'दिल्ली मेरी जान' तो वर्तमान में रेडियो भी चल रहा है और एक वीकेंड शो कर रही हूं, जिसका नाम 'big heroes' है। इसके अलावा 'इंडिया अहेड' चैनल के लिए टॉक शो भी कर रही हूं। इसके अलावा मैं लाइव शो भी करती हूं, लेकिन जैसा कि आपसे मैंने कहा कि मैं अधिक प्लान नहीं करती। 'ओशो' को मानती हूं, थोड़ी आध्यात्मिक हूं। मेरे पास जो भी काम आता है उसे बड़ी शिद्द्त से करती हूं बाकी अधिक नहीं सोचती।' |
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